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फ़ोटो साभार - ट्विटर

नागरिकता क़ानून: रविवार रात हुआ जोरदार प्रदर्शन, जामिया-एएमयू में बवाल

नागरिकता संशोधन क़ानून को लेकर विरोध बढ़ता ही जा रहा है। रविवार को क़ानून के विरोध में दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान जमकर हिंसा हुई और कुछ बसों और बाइकों में आग लगा दी गई। इसके अलावा रविवार रात को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भी बवाल हुआ और पुलिस को हालात को सामान्य करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े। 

दिल्ली में इस मामले को लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी आमने-सामने आ गए हैं। हिंसा के लिए दोनों एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी प्रशासन ने दिल्ली पुलिस पर कैंपस में जबरन घुसने और छात्रों व स्टाफ़ से मारपीट करने का आरोप लगाया है। लेकिन पुलिस ने आरोपों को ग़लत बताया है और कहा है कि पुलिस पर पथराव किया गया। 

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पुलिस की कार्रवाई के विरोध में जामिया, जेएनूय के छात्र रविवार रात को आईटीओ स्थित दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हो गए और सुबह 4 बजे तक प्रदर्शन किया। छात्रों ने दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ जमकर नारेबाजी की। जब पुलिस ने हिरासत में लिए गए जामिया के छात्रों को रिहा किया, तब जाकर छात्र मुख्यालय से हटे। 
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सोमवार को बंद रहेंगे स्कूल

बवाल के बाद बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए दिल्ली सरकार ने साउथ ईस्ट जिले में ओखला, जामिया, न्यू फ्रैंड्स कालोनी, मदनपुर खादर क्षेत्र के सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों को बंद रखने का फ़ैसला किया है। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा कि वर्तमान हालात को देखते हुए दिल्ली सरकार ने स्कूल बंद रखने का निर्णय लिया है। 

खोले गए मेट्रो स्टेशन

न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी और आस-पास के इलाक़ों में हुए इस बवाल के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने कई मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया था। इनमें जसोला विहार, आईटीओ, वसंत विहार, मुनिरका, आरके पुरम, पटेल चौक, आईआईटी, दिल्ली गेट, प्रगति मैदान, शाहीनबाग, सुखदेव विहार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया, ओखला, विश्वविद्यालय, जीटीबीनगर और कुछ अन्य थे। लेकिन सोमवार सुबह दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने कहा है कि सभी मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट गेट को खोल दिया गया है और सभी स्टेशनों पर सामान्य सेवाएं फिर से शुरू हो चुकी हैं। 

कई राज्यों में हो रहा विरोध 

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ चल रहा आंदोलन पूर्वोत्तर के राज्यों से शुरू होकर कई राज्यों तक पहुंच गया है। दिल्ली, पश्चिम बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश में विधेयक को लेकर लोग सड़कों पर उतर रहे हैं। पश्चिम बंगाल के कई इलाक़ों में बसों और ट्रेनों में आग लगा दी गई है। बिहार में राष्ट्रीय जनता दल ने विधेयक के विरोध में  21 दिसंबर को ‘बिहार बंद’ बुलाया है। पश्चिम बंगाल, पंजाब और केरल की सरकारों ने कहा है कि वे अपने-अपने राज्यों में इस क़ानून को लागू नहीं होने देंगे। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस शासित सरकारों ने भी इस क़ानून को संविधान विरोधी क़रार दिया है। 

इस क़ानून के अनुसार 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बाँग्लादेश से भारत आए हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के लोगों को अवैध नागरिक नहीं माना जाएगा और उन्हें भारत की नागरिकता दी जाएगी।

विपक्षी राजनीतिक दलों का कहना है कि यह क़ानून संविधान के मूल ढांचे के ख़िलाफ़ है। इन दलों का कहना है कि यह क़ानून संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 का उल्लंघन करता है और धार्मिक भेदभाव के आधार पर तैयार किया गया है।

सहारनपुर के डीएम ने कहा है कि क़ानून-व्यवस्था के मद्देनजर मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया गया है और अगला आदेश आने तक इंटरनेट सेवाएं बंद रहेंगी। 

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